वन कर्मचारियों ने खोला मोर्चा: चरणबद्ध आंदोलन का ऐलान, 25 मई को कार्य बंद और आगे अनिश्चितकालीन हड़ताल की चेतावनी
समस्याओं का निराकरण नहीं हुआ तो आंदोलन तेज होगा”

वन कर्मचारियों ने खोला मोर्चा: चरणबद्ध आंदोलन का ऐलान, 25 मई को कार्य बंद और आगे अनिश्चितकालीन हड़ताल की चेतावनी
बिलासपुर। छत्तीसगढ़ वन कर्मचारी संघ, संभाग बिलासपुर ने वन विभाग में कर्मचारियों की लंबित समस्याओं, कथित नियम विरुद्ध स्थानांतरण और विभागीय उपेक्षा के विरोध में चरणबद्ध आंदोलन का ऐलान कर दिया है। संघ ने मुख्य वन संरक्षक, बिलासपुर वृत्त को पत्र जारी कर साफ कर दिया है कि यदि समस्याओं का त्वरित निराकरण नहीं हुआ तो कर्मचारी आंदोलन को उग्र रूप देंगे।

संघ की ओर से जारी पत्र में बताया गया है कि कर्मचारियों की समस्याओं को लेकर पूर्व में भी विभागीय अधिकारियों को अवगत कराया गया था। 5 मई 2026 को कार्यालयीन पत्र क्रमांक 13 के माध्यम से कर्मचारियों की मांगों और परेशानियों के समाधान की मांग की गई थी, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं होने से कर्मचारियों में भारी नाराजगी है। संघ का आरोप है कि वन विभाग में नियम विरुद्ध स्थानांतरण, कर्मचारियों की उपेक्षा और अन्य प्रशासनिक समस्याओं को लगातार नजरअंदाज किया जा रहा है। कई बार मांग उठाने के बावजूद समाधान नहीं मिलने से अब कर्मचारियों ने आंदोलन का रास्ता अपनाने का निर्णय लिया है।


चार चरणों में होगा आंदोलन
वन कर्मचारी संघ द्वारा जारी कार्यक्रम के अनुसार आंदोलन को चार चरणों में चलाया जाएगा—

पहला चरण: काली पट्टी लगाकर विरोध
13 मई 2026 को वन कर्मचारी ड्यूटी के दौरान काली पट्टी बांधकर विरोध प्रदर्शन करेंगे। इसके माध्यम से कर्मचारी शासन और विभागीय अधिकारियों तक अपनी नाराजगी पहुंचाएंगे।
दूसरा चरण: सांकेतिक धरना-प्रदर्शन
18 मई 2026 को भोजन अवकाश के दौरान मुख्य वन संरक्षक कार्यालय, बिलासपुर वृत्त के सामने सांकेतिक धरना-प्रदर्शन किया जाएगा। इस दौरान कर्मचारी अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन करेंगे।
तीसरा चरण: कार्य बंद आंदोलन
यदि इसके बाद भी समस्याओं का समाधान नहीं हुआ तो 25 मई 2026 को वन कर्मचारी एक दिवसीय अवकाश पर रहकर संपूर्ण कार्य बंद करेंगे। इससे विभागीय कामकाज प्रभावित होने की संभावना जताई जा रही है।
चौथा चरण: अनिश्चितकालीन हड़ताल
संघ ने चेतावनी दी है कि मांगें पूरी नहीं होने पर आगामी चरण में अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू की जाएगी, जिसकी जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी।
“समस्याओं का निराकरण नहीं हुआ तो आंदोलन तेज होगा”
संभागीय अध्यक्ष प्रीतम कुमार पुराईन द्वारा हस्ताक्षरित पत्र में कहा गया है कि कर्मचारियों की समस्याओं के समाधान के लिए लगातार प्रयास किए गए, लेकिन विभागीय स्तर पर कोई सकारात्मक पहल नहीं हुई। ऐसे में कर्मचारियों को आंदोलन के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। पत्र में यह भी उल्लेख किया गया है कि यदि समय रहते समस्याओं का निराकरण नहीं किया गया तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा। संघ ने साफ कहा है कि कर्मचारियों के हितों से समझौता नहीं किया जाएगा।
कई अधिकारियों को भेजी गई प्रतिलिपि
संघ द्वारा जारी पत्र की प्रतिलिपि वन कर्मचारी संघ रायपुर, बिलासपुर संभाग के पदाधिकारियों, पुलिस महानिरीक्षक, जिला प्रशासन और वन मंडल अधिकारियों सहित कई जिम्मेदार अधिकारियों को भी भेजी गई है, ताकि आंदोलन और कर्मचारियों की मांगों की जानकारी शासन-प्रशासन तक पहुंचे।वन विभाग में कर्मचारियों के इस आंदोलन की घोषणा के बाद प्रशासनिक हलकों में हलचल तेज हो गई है। अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि विभागीय अधिकारी कर्मचारियों की मांगों पर क्या रुख अपनाते हैं और आंदोलन को रोकने के लिए क्या पहल की जाती है।








